न रोको मुझको उड़ने दो

सरिता सेठी

हाँ, मैं हूँ उड़ने को तैयार,
खुले आसमान में अपने पंख पसार।
न रोको मुझको उड़ने दो,
नील गगन छू लेने दो।
न लगाओ पहरे हजार,
दे कर देखो मौका एक बार।
मुझमें हैं वो सारी क्षमताएं,
खुद ही कर लूंगी दूर बाधाएं।
देखो तो कर के विश्वास,
दिखा दूंगी मैं हूँ कुछ खास।
न रोको मुझको उड़ने दो,
नील गगन छू लेने दो।

(एक बेटी की चाह)

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